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News 21 June 2018

नपा द्वारा शून्य कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला का हुआ आयोजन, रैली निकालकर दिया स्वच्छता का संदेश


बालाघाटः- नगरपालिका परिषद बालाघाट एवं स्टीनमार्क (साईं ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट एवं मार्केटिंग रिसर्च सेंटर) के संयुक्त तत्वाधान में 21 जून को शून्य कचरा प्रबंधन के तहत प्रायोगिक कार्यशाला का आयोजन स्थानीय मोती उद्यान में किया गया। कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग प्रभारी श्री प्रदीप परांजपे, स्वच्छता उप निरीक्षक श्रीमती धनवंती नगपुरे, नगरपालिका स्वच्छ भारत अभियान सलाहकार श्री ए.के.चाल्र्स, विकलांग पुनर्वास केंद्र के डाॅ.शुक्ला, के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। इससे पूर्व नगर में एक स्वच्छता जागरूकता रैली निकाली गई यह रैली ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के कार्यालय स्नेह नगर से निकलकर नगर के मुख्य मार्ग से होते हुये अम्बेडकर चैक होते हुये स्थानीय मोती उद्यान पहुंची जहां कचरा प्रबंधन पर कार्यशाला आयोजित कर विद्यार्थीयों को कचरा पृथक्करण तथा उसके प्रबंधन पर व्याख्यान दिये गये। रैली की अगुवाई साईं ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट एवं मार्केटिंग रिसर्च सेंटर के चेयरमेन श्री लवकुश गुप्ता, तथा श्री राजेंद्र लेंडे, द्वारा की गई। इस अवसर पर उप राजस्व निरीक्षक श्री रेखलाल राहंगडाले, श्री राजेंद्र बोपचे, राजेंश मिश्रा, सुरेश वाघाड़े, सहित नगरपालिका के आधा सैकड़ा से अधिक कर्मचारी उपस्थित रहे। इन कर्मचारियों को विकलांग पुनर्वास केंद्र के डाॅ श्री शुक्ला द्वारा अपने-अपने कार्य क्षेत्र में राजस्व वसूली के दौरान नागरिकों से कचरा संग्रहण हेतु डस्टबीन के प्रयोग तथा अलग-अलग कचरा रखने हेतु प्रेरित करने के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि आज के समय में परिवार की सबसे मजबूत कड़ी बच्चे हैं बच्चों की जिद माता-पिता से अनेक कार्य करवाती है। सबसे पहले हमें स्वच्छता के प्रति बच्चों को जागरूक करना होगा। उन्हें यह अहसास दिलाना होगा कि घर में कचरे को अलग-अलग रखना तथा उनका प्रबंधन क्यों आवश्यक है। बच्चों के जागरूक होने से वे माता-पिता को भी अलग-अलग डस्टबीन रखने हेतु जिद करेगें।
ज्ञात हो कि नगरपालिका परिषद बालाघाट द्वारा गुरूवार को स्थानीय मोती उद्यान में एक दिवसीय कचरा प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें उद्यान में स्थापित फोटो प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थीयों को कचरे के प्रकार, कचरा पृथक्करण, सूखे एवं गीले कचरे को अलग-अलग रखते हुये उनका प्रबंधन, गीले कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया सहित अनेक चरणों की जानकारी दी गई। इस संबंध में नगरपालिका के स्वच्छ भारत अभियान के सलाहकार श्री ए.के. चाल्र्स द्वारा प्रशिक्षार्थियों को कचरे के प्रकार घरों से निकलने वाले कचरे के पृथक्करण, उनके प्रबंधन, सूखे कचरे के प्रयोग, तथा गीले कचरे से खाद बनाने की प्रक्रिया के तहत व्याख्यान दिये गये। श्री चाल्र्स ने कहा कि घरों से निकलने वाला कचरा कभी भी प्रकृति के लिये समस्या नहीं थे किंतु पाॅलिथीन के व्यापक रूप में प्रयोग ने कचरे का स्वरूप बदल दिया है। पाॅलिथीन कभी न समाप्त होने वाला कचरा हैं। हमें जितना जल्दी हो सके पाॅलिथीन के प्रयोग को पूर्णतः समाप्त करना होगा।
वहीं नगरपालिका स्वास्थ्य विभाग प्रभारी श्री प्रदीप परांजपे ने बताया कि कचरे का प्रबंधन कोई नई चीज नहीं है आपको कचरे का सबसे सही प्रबंधन ग्रामीण अंचलों में दिखाई देगा। ग्रामीण क्षेत्रों में घरों से निकलने वाले प्रायः सभी कचरे, पेड़ो के सूखे पत्ते, साग-सब्जीयों के छिलके आदि को घर में गढडा करके कम्पोस्ट खाद बनाई जाती है जो खेती तथा बागवानी के लिए पूरी तरह से लाभप्रद एवं सुरक्षित होती है। उन्होंने कहा कि हमें केवल अपने नजरिये को बदलते हुये उन्हीं प्रक्रियाओं से गुजरते हुये न केवल अपने आसपास के वातावरण को साफ-सुथरा तथा स्वच्छ रखना है बल्कि घर से निकलने वाले कचरे से बनी खाद से अपने आसपास हरियाली का वातावरण भी हम निर्मित कर सकते है। इस अवसर पर लगभग एक सैकड़ा विद्यार्थियों ने स्वच्छता के सबंध में सामाजिक जागरूकता फैलाने हेतु शपथ ग्रहण की।

 

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